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Video: हवाओं का सौदागर खुद हो गया ‘हवा’, खुद की जान देकर पर्यटक को बचा गया हिमाचल का ‘जांबाज’

कहते हैं मौत और बुरा वक्त, जगह और चेहरा देखकर नहीं आते। जिसे आसमानों में उड़ने का जुनून था, जिसे परिंदों की तरह हवाओं से बात करने की आदत थी, अंत में वही आसमान उसकी आखिरी मंजिल बन गया। हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध पैराग्लाइडिंग साइट में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसमें एक पायलट की जान चली गई, लेकिन उसने की एक ऐसी मिसाल कायम की, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हैं।

मृतक की पहचान पायलट मोहन सिंह के रूप में हुई है जाेकि मंडी जिला के बराेट के रहने वाले थे। मोहन सिंह बीड़-बिलिंग के सबसे अनुभवी और बेहतरीन पायलट्स में से एक माने जाते थे। आसमान उनका दूसरा घर था, लेकिन शायद इस बार किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पश्चिम बंगाल से आए एक पर्यटक के साथ मोहन ने हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए उड़ान भरी।

अभी उड़ान शुरू ही हुई थी कि कुछ पलों बाद हवा में ही पैराग्लाइडर की लाइनों और विंग सिस्टम ने दगा दे दिया। ग्लाइडर बेकाबू होकर जमीन की तरफ गिरने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों और हालात को देखकर लगता है कि मोहन ने अपनी जान की परवाह किए बिना आखिरी सांस तक पर्यटक को सुरक्षित रखने की कोशिश की। वो खुद मौत के सामने ढाल बनकर खड़े हो गए।

क्रैश लैंडिंग इतनी जबरदस्त थी कि दोनों कई फुट की ऊंचाई से धड़ाम से गिरे। स्थानीय लोग तुरंत माैके पर दौड़े और दोनों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन अफसोस…पायलट मोहन सिंह अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी की जंग हार गए। हवा के साथ हवा होने की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

जैसे ही मोहन के घर पर उनकी मौत की खबर पहुंची, कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक झटके में परिवार ने अपना बेटा और कमाई का एकमात्र जरिया खो दिया। उस घर के दर्द का अंदाजा लगाना मुश्किल है, जहां अब कभी मोहन लौटकर नहीं आएगा। वहीं हजारों मील दूर से पहाड़ों की खूबसूरती निहारने आया पर्यटक शायद यह कभी नहीं भूल पाएगा कि उसे बचाने के लिए किसी ने अपनी जान की बाजी लगा दी। डॉक्टरों ने पर्यटक को खतरे से बाहर बताया है।

उधर, प्रशासन भी हरकत में आया है। पुलिस और पर्यटन विभाग हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। कांगड़ा के DTDO विनय कुमार ने बताया कि साइट पर तैनात मार्शल और तकनीकी सलाहकारों से रिपोर्ट तलब की गई है। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एडवेंचर स्पोर्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर लगा एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। प्रोटोकॉल और उपकरणों की जांच में लापरवाही किसी के घर का उजाला छीन रही है। मोहन सिंह तो एक नायक की तरह विदा हो गए, लेकिन यह हादसा एक चेतावनी है, ताकि फिर किसी पायलट के पंख इस तरह न टूटें और न किसी पर्यटक की छुट्टियां मातम में बदलें।

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Author: Desk

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