हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर में हुई एक हृदयविदारक घटना ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। भरमाणी माता मंदिर की ऊंची पहाड़ियों पर वीडियो शूट करने और ट्रैकिंग का शौक दो ममेरे भाइयों के लिए जानलेवा साबित हुआ। बर्फीले तूफान में फंसने से 19 वर्षीय बिकसित राणा और उनके 13 वर्षीय ममेरे भाई पीयूष की दर्दनाक मौत हो गई। इस त्रासदी की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई जब बचाव दल मौके पर पहुंचा, वहां एक भाई का शव और उसका वफादार कुत्ता (पिटबुल) 4 दिनों तक अपने मालिक की रखवाली करता मिला।
दोस्तों ने रोका, लेकिन नहीं माने विकसित और पीयूष
घटना की जानकारी भरमौर निवासी और बिकसित के साथी मंजू ने सांझा की है। मंजू के मुताबिक बिकसित और पीयूष ने भरमाणी माता मंदिर से ऊपर की पहाड़ियों पर जाकर वीडियो शूट करने और कैंपिंग का प्लान बनाया था। उनके साथ कुछ और दोस्त भी जाने वाले थे। हालांकि, इंटरनेट पर 23 जनवरी को भारी बर्फबारी और खराब मौसम की चेतावनी देखकर बाकी दोस्तों ने प्लान रद्द कर दिया। साथियों ने विकसित को फोन कर रुकने की सलाह दी और मौसम का हवाला दिया, लेकिन बिकसित ने बताया कि वह पीयूष और अपने दो पिटबुल कुत्तों के साथ निकल चुका है। शायद नियति को यही मंजूर था, इसलिए बार-बार रोकने पर भी वे नहीं रुके।
बर्फीले तूफान में फंसे, आखिरी कॉल में मांगी मदद
23 जनवरी को जब दोनों भाई कैंपिंग कर रहे थे, तभी कुदरत का कहर बरपा। भारी बर्फबारी और बर्फीला तूफान शुरू हो गया। बिकसित ने किसी तरह गांव के एक लड़के को फोन किया और बताया कि वे बुरी तरह फंस गए हैं। उसने बताया कि छोटे भाई पीयूष की तबीयत बहुत खराब हो रही है, उसके जूते बर्फ में कहीं खो गए हैं और फोन की बैटरी खत्म होने वाली है।
मदद के लिए निकले गांववाले, लेकिन कुदरत ने रोका रास्ता
मंजू ने बताया कि लाेग कह रहे हैं कि गांव वालाें ने मदद नहीं की, लेकिन ये सच नहीं है। विकसित का फाेन आने के बाद गांव के कुछ युवक उन्हें बचाने निकले, लेकिन मंदिर तक पहुंचते-पहुंचते मौसम इतना भयानक हो चुका था कि आगे बढ़ना नामुमकिन था। विजिबिलिटी शून्य थी और तूफान जानलेवा था। मजबूरी में मदद करने वालों को वापस लौटना पड़ा। उस वक्त वहां सिर्फ हेलिकॉप्टर ही पहुंच सकता था।
4 दिन तक शव के पास बैठा रहा शेरू
प्रशासन ने सेना की मदद से रेस्क्यू ऑप्रेशन चलाया। ड्रोन और हेलिकॉप्टर के जरिए सर्च अभियान के बाद रेस्क्यू टीम पहाड़ी पर उतरी। वहां का मंजर देख सब दंग रह गए। एक पेड़ के नीचे 13 साल के पीयूष का शव पड़ा था, जिसके पैरों को ठंड से बचाने के लिए स्लीपिंग बैग से लपेटा गया था। पीयूष के शव के पास बिकसित का पालतू कुत्ता शेरू बैठा था। वह पिछले चार दिनों से भूखा-प्यासा अपने नन्हे मालिक के शव की निगरानी कर रहा था। वहीं, पीयूष के शव से करीब 800 मीटर नीचे नाले में बिकसित का शव बरामद हुआ। आशंका है कि पीयूष की मौत के बाद बिकसित मदद लाने के लिए नीचे उतरने की कोशिश कर रहा होगा, तभी पैर फिसलने से वह खाई में गिर गया। दूसरे कुत्ते का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, आशंका है कि उसे जंगली जानवरों ने अपना शिकार बना लिया।
जिंदा रहने के लिए किया कड़ा संघर्ष
रेस्क्यू टीम के अनुसार दोनों भाइयों ने बचने के लिए मौत से कड़ा संघर्ष किया होगा। वे शायद दो दिनों तक जिंदा रहे थे, लेकिन माइनस तापमान और भयानक बर्फबारी के आगे उनकी हिम्मत जवाब दे गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। लोग कह रहे हैं कि काश, उन्होंने अपने दोस्तों की बात मान ली होती तो आज वे जिंदा होते। भगवान दोनों भाइयों की आत्मा को शांति दे और परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।








