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ऊना: सरकारी कर्मचारी ने पत्नी के साथ मिलकर किया 40 लाख का फर्जीवाड़ा, काेर्ट ने दिए FIR दर्ज करने के आदेश

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में फ्लैट बेचन के नाम पर 40 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक सरकारी कर्मचारी ने पत्नी के साथ मिलकर उस फ्लैट का साैदा कर दिया, जिसके वे मालिक ही नहीं थे। पीड़ित की बार-बार शिकायत के बावजूद स्थानीय पुलिस और जिला एसपी किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) नेहा शर्मा ने पुलिस को तुरंत दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का एफआईआर दर्ज करने का सख्त आदेश जारी किया है।

पीड़ित अपनी पत्नी के नाम लेना चाहता था 2BHK फ्लैट

शिकायतकर्ता शिवपुर (अम्ब) निवासी धर्मेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी कृष्णा देवी के नाम 2BHK फ्लैट खरीदने का सौदा प्रीतम कसना और उसकी पत्नी परमजीत कौर से किया था, क्योंकि प्रीतम कसनासरकारी कर्मचारी था, इसलिए धर्मेंद्र को उस पर पूर्ण विश्वास था। फ्लैट का सौदा 44 लाख रुपए में तय हुआ। इकरारनामे में आरोपी जोड़े ने परमजीत कौर को उस संपत्ति का पूर्ण मालिक बताया था। विश्वास कर धर्मेंद्र ने आरोपियों को लगभग 40 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। पैसे मिलने के बाद आरोपी लगातार फ्लैट की रजिस्ट्री कराने में आनाकानी करने लगे। मामला बिगड़ने पर धर्मेंद्र उनसे पैसे वापस मांगने लगा, लेकिन आरोपी पैसे देने से इंकार करने लगे। इसके बाद धर्मेंद्र को अदालत की शरण लेनी पड़ी। शुरुआत में अदालत द्वारा की गई मध्यस्थता के दौरान आरोपी जोड़े ने अपनी गलती मान ली और 30 मई 2025 से पहले कुल 34 लाख रुपए पीड़ित को वापस करने का वायदा भी किया था, लेकिन तय तारीख बीत जाने के बाद भी उन्होंने एक पैसा भी वापस नहीं दिया।

राजस्व रिकॉर्ड में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

पैसे न मिलने पर धर्मेंद्र ने अदालत में एक्जीक्यूशन पटीशन दायर की और आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की मांग की। अदालत के आदेश पर जब राजस्व रिकॉर्ड की जांच हुई तो सबके होश उड़ गए। जिस फ्लैट का सौदा हुआ था, उसके मालिक प्रीतम और परमजीत कौर बिल्कुल भी नहीं थे। दूसरे की संपत्ति को दिखा कर फर्जी इकरारनामा बनाकर उन्होंने सीधे 40 लाख रुपए ठग लिए।

पीड़ित काे फिर लेनी पड़ी अदालत की शरण

पीड़ित के वकील योगेश्वर पाठक ने बताया कि इस फर्जीवाड़े की पूरी शिकायत पहले स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई गई, इसके बाद जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) ऊना से भी अपील की गई लेकिन किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आखिरकार पीड़ित को फिर से अदालत की शरण लेने को मजबूर होना पड़ा। मामले की अत्यंत गंभीरता को देखते हुए सीजेएम नेहा शर्मा ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपी पति-पत्नी के खिलाफ तुरंत धोखाधड़ी का एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए।

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Author: Desk

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